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दुनिया ने जैसे सामाजिक मीडिया को बदल दिया

दुनिया ने जैसे सामाजिक मीडिया को बदल दिया, हम क्यों पोस्ट करते हैं ग्रन्थ श्रृंखला का पहला ग्रन्थ है जो उन नौ मानवविज्ञानियों के निष्कर्षों पर जाँच करता है जिन्होंने दुनिया भर के समूहों में १५ महीने तक बिताया जिसमे शामिल है ब्राज़ील, चिली, चीन, इंग्लैंड, भारत, इटली, ट्रिनिडाड और टर्की. यह ग्रन्थ एक तुलनात्मक विश्लेषण को प्रदान करता है जो अनुसंधान के परिणाम को संक्षेप में प्रस्तुत करता है और राजनीति और लिंग, शिक्षा और व्यापार पर सामाजिक मीडिया के प्रभाव का पता लगाता है. दृश्य संचार पर बढ़ते हुए ज़ोर का परिणाम क्या है? क्या हम अधिक व्यक्तिगत या सामाजिक बनते हैं? क्यों सार्वजनिक सामाजिक मीडिया अधिक रूढ़िवादी होता है? क्यों ऑनलाइन समानता ऑफलाइन असमानता को बदलने में असफल होता है? कैसे मिमी इंटरनेट के नैतिक पुलिस बन गए?

परियोजना के शैक्षिक ढाँचा और सैद्धांतिक शर्तों, जो निष्कर्षों के उत्तरदायी होने में मदद करते हैं, के परिचय से समर्थित होकर यह ग्रन्थ तर्क करता है कि सामाजिक मीडिया जैसे अन्तरंग और सर्वव्यापक वास्तु को समझने और मूल्यांकन करने का एक ही रास्ता पोस्ट करनेवाले लोगों के जीवन में तल्लीन होकर रहना है. तभी हम पता लगा सकते हैं कि दुनिया भर के लोगों ने जैसे सामाजिक मीडिया को अभी तक अप्रत्याशित तरीकों से बदल दिया हैं और उनके परिणाम पर आकलन कर सकते हैं.

दक्षिण भारत में सामाजिक मीडिया

दक्षिण भारत पर सामाजिक मीडिया, जो तमिलनाडु में लोगों के दैनिक जीवन में सामाजिक मीडिया के उपयोग पर अन्वेषण करनेवाले पहले के नृवंशवैज्ञानिक अध्ययनों पर एक है, तेज़ी परिवर्तन का अनुभव करनेवाले एक क्षेत्र में इस विषय का ज्ञान प्रदान करता है. जो एक समय कृषि से हावी किया गया था, उस क्षेत्र पर पिछले दशक में आईटी कंपनियों का प्रवेश, एक उद्विकासी ज्ञान अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन की परिपाटी के बीच एक जटिल मुकाबला का कारण बन गया है. जबकि इस मुकाबले के उत्तरक्रिया के रूप में कुछ वर्गीय तनाव प्रकट हुए हैं, इस क्षेत्र के सामाजिक मीडिया पर अध्ययन इसका प्रस्ताव करता है कि समरूपता का भी पता चलता है, जो पुराने और नए निवासियों के काम और जीवन की सीमाओं के धुंधुला होने से अधिक स्पष्ट रूप से अवलोकन किया जाता है.

वेंकटरामन घर, काम और स्कूल पर सामाजिक मीडिया के प्रभाव पर अन्वेषण करते हैं और वर्ग, जाति, उम्र और लिंग के प्रभाव पर इसका विश्लेशण करते हैं कि जैसे और जो सामाजिक मीडिया के मंच विभिन्न सन्दर्भों पर उपयोग किये जाते हैं. वे ऐसा तर्क करते हैं कि ये कारक के सामाजिक मीडिया के उपयोग पर महत्वपूर्ण प्रभाव होता है और इसका प्रस्ताव करते हैं दक्षिण भारत में सामाजिक मीडिया, यद्यपि सामाजिक परिवर्तन को प्रेरित करने लगता है, वास्तव में सामाजिक परिपाटी और प्रयोग से सीमित हैं.

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